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ramayan 1.45.20: 'उस समय अग्नि के समान प्रज्वलित होने वाला हलाहल नामक अत्यन्त भयंकर विष वहाँ प्रकट हुआ, जिससे देवता, दानव और मनुष्य सहित सम्पूर्ण जगत् दग्ध होने लगा ॥20॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.45.20 
उत्पपाताग्निसंकाशं हालाहलमहाविषम्।
तेन दग्धं जगत् सर्वं सदेवासुरमानुषम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'उस समय अग्नि के समान प्रज्वलित होने वाला हलाहल नामक अत्यन्त भयंकर विष वहाँ प्रकट हुआ, जिससे देवता, दानव और मनुष्य सहित सम्पूर्ण जगत् दग्ध होने लगा ॥20॥
 
'So at that time, a very dangerous poison named Halahal, burning like fire, rose up there. He started burning the entire world including gods, demons and humans. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)