Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.45.19: 'एक हजार वर्ष बीत जाने पर रस्सियों से बने हुए सर्पों के असंख्य मुखों ने बहुत अधिक विष उगलना आरम्भ कर दिया और अपने दांतों से मंदार पर्वत की चट्टानों को काटने लगे। | ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'एक हजार वर्ष बीत जाने पर रस्सियों से बने हुए सर्पों के असंख्य मुखों ने बहुत अधिक विष उगलना आरम्भ कर दिया और अपने दांतों से मंदार पर्वत की चट्टानों को काटने लगे।
‘After a thousand years had passed, the numerous mouths of the serpents made of ropes began spewing out a lot of venom and biting the rocks of Mount Mandara with their teeth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥