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ramayan 1.45.12: महामुनि! आपका कल्याण हो। मैं यह सुनना चाहता हूँ कि विशाला में कौन-सा वंश राज्य कर रहा है। मैं इसके लिए बहुत उत्सुक हूँ।॥12॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.45.12 
कतमो राजवंशोऽयं विशालायां महामुने।
श्रोतुमिच्छामि भद्रं ते परं कौतूहलं हि मे॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महामुनि! आपका कल्याण हो। मैं यह सुनना चाहता हूँ कि विशाला में कौन-सा वंश राज्य कर रहा है। मैं इसके लिए बहुत उत्सुक हूँ।॥12॥
 
‘Mahamuni! May you be blessed. I wish to hear which dynasty is ruling in Vishala. I am very eager for this.’॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)