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ramayan 1.45.1: विश्वामित्र के वचन सुनकर लक्ष्मण और श्री रामचन्द्रजी को बड़ा आश्चर्य हुआ। वे मुनि से इस प्रकार बोले-॥1॥   |   ramayan सर्ग 1.45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 45: देवताओं और दैत्यों द्वारा क्षीर-समुद्र मन्थन, भगवान् रुद्र द्वारा हालाहल विष का पान, देवासुर-संग्राम में दैत्यों का संहार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.45.1 
विश्वामित्रवच: श्रुत्वा राघव: सहलक्ष्मण:।
विस्मयं परमं गत्वा विश्वामित्रमथाब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र के वचन सुनकर लक्ष्मण और श्री रामचन्द्रजी को बड़ा आश्चर्य हुआ। वे मुनि से इस प्रकार बोले-॥1॥
 
On hearing the words of Vishwamitra, Lakshmana and Shri Ramchandra were very surprised. They spoke to the sage in this manner -॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)