Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.44.8: 'हे राजन! आपके पूर्वज परम पुण्यशाली एवं प्रतापी राजा सगर भी गंगा को यहाँ लाना चाहते थे, किन्तु उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई।   |   ramayan सर्ग 1.44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.44.8 
पूर्वकेण हि ते राजंस्तेनातियशसा तदा।
धर्मिणां प्रवरेणाथ नैष प्राप्तो मनोरथ:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'हे राजन! आपके पूर्वज परम पुण्यशाली एवं प्रतापी राजा सगर भी गंगा को यहाँ लाना चाहते थे, किन्तु उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई।
 
'O King! Your ancestor, the most virtuous and glorious king Sagar, also wanted to bring Ganga here; but his wish was not fulfilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)