Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.44.23: ककुत्स्थकुलभूषण! जो मनुष्य इसे सुनता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, उसकी आयु बढ़ती है और उसकी कीर्ति का विस्तार होता है। ॥23॥ | ramayan सर्ग 1.44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ककुत्स्थकुलभूषण! जो मनुष्य इसे सुनता है, उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, उसकी आयु बढ़ती है और उसकी कीर्ति का विस्तार होता है। ॥23॥
Kakutsthakulbhushan! One who listens to this gets all his desires fulfilled. All his sins are destroyed and his age increases and his fame expands. ॥23॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे चतुश्चत्वारिंश: सर्ग:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें चौवालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥