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ramayan 1.44.20: श्री राम! मैंने तुम्हें गंगाजी की कथा विस्तार से सुनाई है। तुम्हारा कल्याण हो। अब जाओ और शुभ संध्यावंदन आदि करो। देखो, संध्या हो रही है।   |   ramayan सर्ग 1.44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.44.20 
एष ते राम गंगाया विस्तरोऽभिहितो मया।
स्वस्ति प्राप्नुहि भद्रं ते संध्याकालोऽतिवर्तते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! मैंने तुम्हें गंगाजी की कथा विस्तार से सुनाई है। तुम्हारा कल्याण हो। अब जाओ और शुभ संध्यावंदन आदि करो। देखो, संध्या हो रही है।
 
Shri Ram! I have told you the story of Gangaji in detail. May you be blessed. Now go and perform the auspicious Sandhyavandan etc. Look, the evening is passing by.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)