श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.44.16 
इत्येवमुक्त्वा देवेश: सर्वलोकपितामह:।
यथागतं तथागच्छद् देवलोकं महायशा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर समस्त लोकों के पितामह, महान देव भगवान ब्रह्माजी जिस प्रकार आये थे, उसी प्रकार देवलोक में लौट गये॥16॥
 
Saying this, the Grandfather of all worlds, the great God Lord Brahmaji, returned to the world of gods in the same manner as he had come. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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