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ramayan 1.44.11: हे निष्पाप! आपके महान तेजस्वी पिता दिलीप भी गंगाजी को यहाँ लाना चाहते थे, किन्तु सफल न हो सके॥ 11॥   |   ramayan सर्ग 1.44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.44.11 
दिलीपेन महाभाग तव पित्रातितेजसा।
पुनर्न शकिता नेतुं गंगां प्रार्थयतानघ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप! आपके महान तेजस्वी पिता दिलीप भी गंगाजी को यहाँ लाना चाहते थे, किन्तु सफल न हो सके॥ 11॥
 
'O sinless one! Even your very brilliant father Dilipa desired to bring Ganga here but could not succeed in doing so.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)