श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 44: ब्रह्माजी का भगीरथ को पितरों के तर्पण की आज्ञा देना, गंगावतरण के उपाख्यान की महिमा  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.44.1-2 
स गत्वा सागरं राजा गंगयानुगतस्तदा।
प्रविवेश तलं भूमेर्यत्र ते भस्मसात्कृता:॥ १॥
भस्मन्यथाप्लुते राम गंगाया: सलिलेन वै।
सर्वलोकप्रभुर्ब्रह्मा राजानमिदमब्रवीत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! इस प्रकार गंगा को साथ लेकर राजा भगीरथ समुद्र के पास गए और उस रसातल में प्रवेश किया जहाँ उनके पूर्वज भस्म हो गए थे। जब वह राख का ढेर गंगा के जल से भर गया, तब समस्त लोकों के स्वामी भगवान ब्रह्मा वहाँ आए और राजा से इस प्रकार बोले -॥1-2॥
 
Shri Ram! Thus, taking Ganga along with him, King Bhagirath went to the sea and entered the abyss where his ancestors had been reduced to ashes. When that mass of ashes was flooded with the water of Ganga, Lord Brahma, the Lord of all the worlds, arrived there and said to the King thus -॥1-2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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