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ramayan 1.43.6-7h: उसके अहंकार को जानकर त्रिनेत्रधारी भगवान हर क्रोधित हो गए और उस समय उन्होंने गंगा को अदृश्य करने का विचार किया ॥6 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  1.43.6-7h 
तस्यावलेपनं ज्ञात्वा क्रुद्धस्तु भगवान् हर:॥ ६॥
तिरोभावयितुं बुद्धिं चक्रे त्रिनयनस्तदा।
 
 
अनुवाद
उसके अहंकार को जानकर त्रिनेत्रधारी भगवान हर क्रोधित हो गए और उस समय उन्होंने गंगा को अदृश्य करने का विचार किया ॥6 1/2॥
 
Knowing his arrogance, the three-eyed Lord Hara became infuriated and at that time he thought of making Ganga invisible. ॥ 6 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)