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ramayan 1.43.5-6h: उस समय अत्यंत प्रचण्ड गंगा देवी ने सोचा कि वे अपने प्रबल प्रवाह से भगवान शंकर के साथ पाताल लोक में प्रवेश करेंगी।   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  1.43.5-6h 
अचिन्तयच्च सा देवी गंगा परमदुर्धरा॥ ५॥
विशाम्यहं हि पातालं स्रोतसा गृह्य शङ्करम्।
 
 
अनुवाद
उस समय अत्यंत प्रचण्ड गंगा देवी ने सोचा कि वे अपने प्रबल प्रवाह से भगवान शंकर के साथ पाताल लोक में प्रवेश करेंगी।
 
At that time the extremely formidable Ganga Devi thought that with her powerful flow she will enter the netherworld along with Lord Shankar. 5 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)