Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.43.4-5h: श्री राम! शंकर जी की आज्ञा पाकर हिमालय की ज्येष्ठ पुत्री गंगा जी, जिनके चरणों में सारा जगत अपना मस्तक झुकाता है, विशाल रूप धारण करके अपने वेग को असह्य बनाकर आकाश से भगवान शंकर के सुन्दर मस्तक पर गिरीं। | ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो हैमवती ज्येष्ठा सर्वलोकनमस्कृता।
तदा सातिमहद्रूपं कृत्वा वेगं च दु:सहम्॥ ४॥
आकाशादपतद् राम शिवे शिवशिरस्युत।
अनुवाद
श्री राम! शंकर जी की आज्ञा पाकर हिमालय की ज्येष्ठ पुत्री गंगा जी, जिनके चरणों में सारा जगत अपना मस्तक झुकाता है, विशाल रूप धारण करके अपने वेग को असह्य बनाकर आकाश से भगवान शंकर के सुन्दर मस्तक पर गिरीं।
Sri Rama! On receiving the permission of Shankar Ji, Ganga Ji, the eldest daughter of Himalaya, at whose feet the whole world bows its head, assumed a huge form and making her speed unbearable, fell from the sky on the beautiful head of Lord Shankar. 4 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥