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ramayan 1.43.39-40h: वहाँ से गंगा पुनः भगीरथ के रथ के पीछे-पीछे चलीं। उस समय नदियों में श्रेष्ठ जाह्नवी, राजा भगीरथ के पूर्वजों के उद्धार का कार्य करने के लिए समुद्र में पहुँचकर पाताल लोक में चली गईं।   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  1.43.39-40h 
जगाम च पुनर्गङ्गा भगीरथरथानुगा।
सागरं चापि सम्प्राप्ता सा सरित्प्रवरा तदा॥ ३९॥
रसातलमुपागच्छत् सिद्धॺर्थं तस्य कर्मण:।
 
 
अनुवाद
वहाँ से गंगा पुनः भगीरथ के रथ के पीछे-पीछे चलीं। उस समय नदियों में श्रेष्ठ जाह्नवी, राजा भगीरथ के पूर्वजों के उद्धार का कार्य करने के लिए समुद्र में पहुँचकर पाताल लोक में चली गईं।
 
From there Ganga again followed Bhagirath's chariot. At that time, the best of the rivers, Jahnavi, reached the sea and went to the netherworld to accomplish the task of redeeming the ancestors of King Bhagirath. 39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)