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ramayan 1.43.33-34h: राजा भगीरथ जिस ओर जाते, सब नदियों में श्रेष्ठ तथा सब पापों का नाश करने वाली गंगा भी उसी ओर चली जातीं।   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  1.43.33-34h 
यतो भगीरथो राजा ततो गंगा यशस्विनी॥ ३३॥
जगाम सरितां श्रेष्ठा सर्वपापप्रणाशिनी।
 
 
अनुवाद
राजा भगीरथ जिस ओर जाते, सब नदियों में श्रेष्ठ तथा सब पापों का नाश करने वाली गंगा भी उसी ओर चली जातीं।
 
Whichever way King Bhagirath went, the Ganga, the best of all the rivers and the destroyer of all sins, also went in that direction. 33 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)