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ramayan 1.43.31-33h: श्री राम! उस समय समस्त देवता, ऋषि, दैत्य, दानव, गन्धर्व, यक्ष, किन्नर, बड़े-बड़े नाग, सर्प और अप्सराएँ - ये सभी राजा भगीरथ के रथ के पीछे-पीछे गंगाजी के साथ-साथ आनन्दपूर्वक चल रहे थे। सभी प्रकार के जलचर भी गंगाजी के उस जल के साथ आनन्दपूर्वक चल रहे थे।   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 31-33h
 
 
श्लोक  1.43.31-33h 
देवा: सर्षिगणा: सर्वे दैत्यदानवराक्षसा:॥ ३१॥
गन्धर्वयक्षप्रवरा: सकिंनरमहोरगा:।
सर्पाश्चाप्सरसो राम भगीरथरथानुगा:॥ ३२॥
गंगामन्वगमन् प्रीता: सर्वे जलचराश्च ये।
 
 
अनुवाद
श्री राम! उस समय समस्त देवता, ऋषि, दैत्य, दानव, गन्धर्व, यक्ष, किन्नर, बड़े-बड़े नाग, सर्प और अप्सराएँ - ये सभी राजा भगीरथ के रथ के पीछे-पीछे गंगाजी के साथ-साथ आनन्दपूर्वक चल रहे थे। सभी प्रकार के जलचर भी गंगाजी के उस जल के साथ आनन्दपूर्वक चल रहे थे।
 
Shri Ram! At that time all the Gods, Rishis, Daityas, Daityas, Demons, Gandharvas, Yakshas, ​​Kinnars, big serpents, snakes and Apsaras - all of them were walking happily along with Gangaji behind the chariot of King Bhagirath. All kinds of aquatic animals were also moving happily along with that water of Gangaji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)