Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.43.29-30h: उस प्रकाशमान जल के स्पर्श से प्रसन्न होकर सारा जगत सदा के लिए महान सुख का अनुभव करने लगा। गंगा में स्नान करके सभी लोग पापमुक्त हो गए।   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  1.43.29-30h 
मुमुदे मुदितो लोकस्तेन तोयेन भास्वता॥ २९॥
कृताभिषेको गंगायां बभूव गतकल्मष:।
 
 
अनुवाद
उस प्रकाशमान जल के स्पर्श से प्रसन्न होकर सारा जगत सदा के लिए महान सुख का अनुभव करने लगा। गंगा में स्नान करके सभी लोग पापमुक्त हो गए।
 
The whole world, delighted by the contact of that luminous water, felt great happiness forever. Everyone became sinless after taking bath in the Ganga.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)