Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.43.27-29h: जो लोग शापग्रस्त होकर आकाश से पृथ्वी पर उतरे थे, वे गंगा के जल में स्नान करके पापरहित हो गए और उस जल से पाप धुल जाने के कारण वे पुनः शुभ पुण्यों से युक्त होकर आकाश में पहुँच गए और अपने लोकों को पा लिया। | ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शापात् प्रपतिता ये च गगनाद् वसुधातलम्॥ २७॥
कृत्वा तत्राभिषेकं ते बभूवुर्गतकल्मषा:।
धूतपापा: पुनस्तेन तोयेनाथ शुभान्विता:॥ २८॥
पुनराकाशमाविश्य स्वाँल्लोकान् प्रतिपेदिरे।
अनुवाद
जो लोग शापग्रस्त होकर आकाश से पृथ्वी पर उतरे थे, वे गंगा के जल में स्नान करके पापरहित हो गए और उस जल से पाप धुल जाने के कारण वे पुनः शुभ पुण्यों से युक्त होकर आकाश में पहुँच गए और अपने लोकों को पा लिया।
Those who had come down from the sky to the earth after being cursed, became sinless by taking bath in the waters of Ganga and due to the sins being washed away by that water, they were again united with auspicious virtues and reached the sky and found their worlds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥