Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.43.25-26h: गंगा का जल बार-बार ऊपर चढ़कर नीचे की ओर गिर रहा था। आकाश से भगवान शंकर के मस्तक पर और फिर पृथ्वी पर गिरता हुआ वह निर्मल एवं पवित्र गंगाजल उस समय अत्यंत शोभायमान हो रहा था। | ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गंगा का जल बार-बार ऊपर चढ़कर नीचे की ओर गिर रहा था। आकाश से भगवान शंकर के मस्तक पर और फिर पृथ्वी पर गिरता हुआ वह निर्मल एवं पवित्र गंगाजल उस समय अत्यंत शोभायमान हो रहा था।
The water of Ganga was repeatedly rising on the higher path and again falling on the lower ground. That pure and holy Ganga water falling from the sky on the head of Lord Shankar and then on the earth was looking very beautiful at that time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥