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ramayan 1.43.19-20h: देवतागण आश्चर्यचकित होकर वहाँ खड़े थे। विश्व में गंगा के अवतरण के इस अद्भुत एवं अपूर्व दृश्य को देखने की इच्छा से महाप्रतापी देवताओं का एक विशाल समूह वहाँ एकत्रित हुआ था।   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  1.43.19-20h 
पारिप्लवगताश्चापि देवतास्तत्र विष्ठिता:।
तदद्भुतमिमं लोके गंगावतरमुत्तमम्॥ १९॥
दिदृक्षवो देवगणा: समीयुरमितौजस:।
 
 
अनुवाद
देवतागण आश्चर्यचकित होकर वहाँ खड़े थे। विश्व में गंगा के अवतरण के इस अद्भुत एवं अपूर्व दृश्य को देखने की इच्छा से महाप्रतापी देवताओं का एक विशाल समूह वहाँ एकत्रित हुआ था।
 
The gods were standing there in wonder. A huge group of illustrious gods had gathered there with the desire to see this wonderful and wonderful scene of the descent of the Ganges in the world. 19 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)