Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.43.17-18: तत्पश्चात् देवता, ऋषि, गन्धर्व, यक्ष और सिद्धगण नगर के आकार के विमानों, घोड़ों और हाथियों पर बैठकर आकाश से पृथ्वी पर उतरी हुई गंगाजी की शोभा निहारने लगे ॥17-18॥   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  1.43.17-18 
ततो देवर्षिगन्धर्वा यक्षसिद्धगणास्तथा॥ १७॥
व्यलोकयन्त ते तत्र गगनाद् गां गतां तदा।
विमानैर्नगराकारैर्हयैर्गजवरैस्तदा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् देवता, ऋषि, गन्धर्व, यक्ष और सिद्धगण नगर के आकार के विमानों, घोड़ों और हाथियों पर बैठकर आकाश से पृथ्वी पर उतरी हुई गंगाजी की शोभा निहारने लगे ॥17-18॥
 
Thereafter, the gods, sages, Gandharvas, Yakshas and Siddhagans, sitting on city-sized airplanes, horses and elephants, started admiring the beauty of Ganga that had descended from the sky to the earth. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)