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ramayan 1.43.12: ह्लादिनी, पावनी और नलिनी- ये तीन शुभ जल से सुशोभित गंगाजी की धाराएँ पूर्व की ओर चलीं॥12॥   |   ramayan सर्ग 1.43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 43: भगीरथ की तपस्या, भगवान् शङ्कर का गंगा को अपने सिर पर धारण करना, भगीरथ के पितरों का उद्धार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.43.12 
ह्लादिनी पावनी चैव नलिनी च तथैव च।
तिस्र: प्राचीं दिशं जग्मुर्गङ्गा: शिवजला: शुभा:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ह्लादिनी, पावनी और नलिनी- ये तीन शुभ जल से सुशोभित गंगाजी की धाराएँ पूर्व की ओर चलीं॥12॥
 
Hladini, Pavani and Nalini—these three auspicious streams of Ganga, adorned with auspicious waters, moved towards the east. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)