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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.42.7 
तस्य चिन्तयतो नित्यं धर्मेण विदितात्मन:।
पुत्रो भगीरथो नाम जज्ञे परमधार्मिक:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इन चिंताओं में प्रतिदिन लगे रहने के दौरान, राजा दिलीप ने, जो अपने धार्मिक आचरण के लिए प्रसिद्ध थे, भगीरथ नामक एक बहुत ही पुण्यशाली पुत्र को जन्म दिया।
 
While daily engaged in these worries, King Dilipa, who was renowned for his righteous conduct, begot a very virtuous son named Bhagiratha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)