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ramayan 1.42.6: उन्हें सदैव यही चिंता रहती थी कि गंगाजी पृथ्वी पर कैसे अवतरित होंगी? उन्हें गंगाजल से कैसे जलांजलि दी जाएगी और वे अपने पितरों को कैसे मुक्ति दिला सकेंगे?॥6॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.42.6 
कथं गंगावतरणं कथं तेषां जलक्रिया।
तारयेयं कथं चैतानिति चिन्तापरोऽभवत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन्हें सदैव यही चिंता रहती थी कि गंगाजी पृथ्वी पर कैसे अवतरित होंगी? उन्हें गंगाजल से कैसे जलांजलि दी जाएगी और वे अपने पितरों को कैसे मुक्ति दिला सकेंगे?॥6॥
 
He was always worried about how Gangaji would be able to descend on earth? How would he be offered Jalanjali with the water of Ganga and how would he be able to liberate his forefathers?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)