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ramayan 1.42.5: अपने पितामहों की हत्या का वृत्तांत सुनकर महाबली दिलीप भी बहुत दुःखी हुए। बहुत सोचने-विचारने के बाद भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके॥5॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.42.5 
दिलीपस्तु महातेजा: श्रुत्वा पैतामहं वधम्।
दु:खोपहतया बुद्धॺा निश्चयं नाध्यगच्छत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अपने पितामहों की हत्या का वृत्तांत सुनकर महाबली दिलीप भी बहुत दुःखी हुए। बहुत सोचने-विचारने के बाद भी वे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके॥5॥
 
Even the mighty Dilipa was very sad on hearing the tale of the murder of his grandfathers. Even after much thought and deliberation he could not arrive at any conclusion.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)