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ramayan 1.42.25: राजा से ऐसा कहकर जगत के रचयिता ब्रह्माजी ने देवी गंगा से भी भगीरथ पर कृपा करने को कहा। इसके बाद वे समस्त देवताओं और मरुतों सहित स्वर्गलोक को चले गए॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.42.25 
तमेवमुक्त्वा राजानं गंगां चाभाष्य लोककृत्।
जगाम त्रिदिवं देवै: सर्वै: सह मरुद्‍गणै:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा से ऐसा कहकर जगत के रचयिता ब्रह्माजी ने देवी गंगा से भी भगीरथ पर कृपा करने को कहा। इसके बाद वे समस्त देवताओं और मरुतों सहित स्वर्गलोक को चले गए॥ 25॥
 
Having said this to the king, the creator of the world, Brahmaji also asked Goddess Ganga to shower her blessings on Bhagirath. After this, he went to heaven along with all the gods and the Maruts.॥ 25॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे द्विचत्वारिंश: सर्ग:॥ ४२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें बयालीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ४२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)