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ramayan 1.42.23: 'राजन्! ये हिमालय की ज्येष्ठ पुत्री हिमवती गंगाजी हैं। इन्हें धारण करने के लिए भगवान शंकर को तैयार कीजिए।'   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.42.23 
इयं हैमवती ज्येष्ठा गंगा हिमवत: सुता।
तां वै धारयितुं राजन् हरस्तत्र नियुज्यताम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! ये हिमालय की ज्येष्ठ पुत्री हिमवती गंगाजी हैं। इन्हें धारण करने के लिए भगवान शंकर को तैयार कीजिए।'
 
'King! This is Himavati Gangaji, the eldest daughter of Himalaya. Prepare Lord Shankar to wear these. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)