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ramayan 1.42.21: राजा भगीरथ के ऐसा कहने पर समस्त जगत के पिता भगवान ब्रह्मा ने मधुर, मंगलमय वाणी में मधुर शब्दों में कहा- 21॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.42.21 
उक्तवाक्यं तु राजानं सर्वलोकपितामह:।
प्रत्युवाच शुभां वाणीं मधुरां मधुराक्षराम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजा भगीरथ के ऐसा कहने पर समस्त जगत के पिता भगवान ब्रह्मा ने मधुर, मंगलमय वाणी में मधुर शब्दों में कहा- 21॥
 
On King Bhagiratha saying this, Lord Brahma, the father of all the world, said in a sweet, auspicious voice with melodious syllables - 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)