Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.42.20: हे प्रभु! मैं आपसे संतान प्राप्ति की भी प्रार्थना करता हूँ। हमारे कुल की परम्परा कभी नष्ट न हो। हे प्रभु! मेरा मांगा हुआ उत्तम वरदान समस्त इक्ष्वाकु वंश पर लागू हो।   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.42.20 
देव याचे ह संतत्यै नावसीदेत् कुलं च न:।
इक्ष्वाकूणां कुले देव एष मेऽस्तु वर: पर:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैं आपसे संतान प्राप्ति की भी प्रार्थना करता हूँ। हमारे कुल की परम्परा कभी नष्ट न हो। हे प्रभु! मेरा मांगा हुआ उत्तम वरदान समस्त इक्ष्वाकु वंश पर लागू हो।
 
‘O Lord! I also pray to you for progeny. May the tradition of our clan never be destroyed. O Lord! The best boon asked for by me should be applicable to the entire Ikshvaku dynasty.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)