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ramayan 1.42.19: ‘जब इन महान् आत्माओं की अस्थियाँ गंगाजी के जल में लीन हो गईं, तब मेरे सभी महान् पूर्वजों को शाश्वत स्वर्ग की प्राप्ति हुई।॥19॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.42.19 
गंगाया: सलिलक्लिन्ने भस्मन्येषां महात्मनाम्।
स्वर्गं गच्छेयुरत्यन्तं सर्वे च प्रपितामहा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘जब इन महान् आत्माओं की अस्थियाँ गंगाजी के जल में लीन हो गईं, तब मेरे सभी महान् पूर्वजों को शाश्वत स्वर्ग की प्राप्ति हुई।॥19॥
 
‘When the ashes of these great souls got soaked in the water of river Ganga, all my great ancestors attained eternal heaven.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)