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ramayan 1.42.18: हे प्रभु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और इस तपस्या का कुछ शुभ फल है, तो सगर के सभी पुत्र मेरे हाथों से गंगाजल ग्रहण करें॥18॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.42.18 
यदि मे भगवान् प्रीतो यद्यस्ति तपस:फलम्।
सगरस्यात्मजा: सर्वे मत्त: सलिलमाप्नुयु:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और इस तपस्या का कुछ शुभ फल है, तो सगर के सभी पुत्र मेरे हाथों से गंगाजल ग्रहण करें॥18॥
 
'O Lord! If you are pleased with me and if this penance has some good result, then may all the sons of Sagar receive the water of the Ganges from my hands.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)