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ramayan 1.42.13-14h: महाबाहो! वे अपनी भुजाएँ उठाकर पंचाग्निका का सेवन करते थे और अपनी इन्द्रियों को वश में करके महीने में एक बार भोजन करते थे। इस प्रकार घोर तपस्या में लीन महान राजा भगीरथ के एक हजार वर्ष बीत गए ॥13 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  1.42.13-14h 
ऊर्ध्वबाहु: पञ्चतपा मासाहारो जितेन्द्रिय:।
तस्य वर्षसहस्राणि घोरे तपसि तिष्ठत:॥ १३॥
अतीतानि महाबाहो तस्य राज्ञो महात्मन:।
 
 
अनुवाद
महाबाहो! वे अपनी भुजाएँ उठाकर पंचाग्निका का सेवन करते थे और अपनी इन्द्रियों को वश में करके महीने में एक बार भोजन करते थे। इस प्रकार घोर तपस्या में लीन महान राजा भगीरथ के एक हजार वर्ष बीत गए ॥13 1/2॥
 
Mahabaho! He used to raise his arms and consume the Panchagnika and by controlling his senses, he used to take food once in a month. Thus, one thousand years of the great King Bhagirath passed by while he was engaged in severe penance. ॥13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)