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ramayan 1.42.10: श्रेष्ठ राजा दिलीप अपने पुत्र भगीरथ को राज्य पर अभिषिक्त करके अपने पुण्यकर्मों के कारण इन्द्रलोक को चले गए ॥10॥   |   ramayan सर्ग 1.42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 42: ब्रह्माजी का भगीरथ को अभीष्ट वर देना, गंगा जी को धारण करने के लिये भगवान् शङ्कर को राजी करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.42.10 
इन्द्रलोकं गतो राजा स्वार्जितेनैव कर्मणा।
राज्ये भगीरथं पुत्रमभिषिच्य नरर्षभ:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ राजा दिलीप अपने पुत्र भगीरथ को राज्य पर अभिषिक्त करके अपने पुण्यकर्मों के कारण इन्द्रलोक को चले गए ॥10॥
 
After anointing his son Bhagiratha to the kingdom, the best king Dilip went to Indraloka due to the good deeds he had done. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)