श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 41: सगर की आज्ञा से अंशुमान् का रसातल में जाकर घोड़े को ले आना और अपने चाचाओं के निधन का समाचार सुनाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.41.18 
कपिलेनाप्रमेयेण दग्धा हीमे महाबला:।
सलिलं नार्हसि प्राज्ञ दातुमेषां हि लौकिकम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
विद्वान् ! नित्य प्रभावशाली महात्मा कपिल ने इन महाबली राजकुमारों को जलाकर मार डाला है। इन्हें सांसारिक जल की वंदना करना उचित नहीं है ॥18॥
 
‘Scholar! The eternally influential Mahatma Kapil has burnt these mighty princes to death. It is not appropriate for them to pay homage to worldly water. 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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