श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 40: सगर के पुत्रों का पृथ्वी को खोदते हुए कपिलजी के पास पहुँचना और उनके रोष से जलकर भस्म होना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  1.40.8-9 
परिक्रान्ता मही सर्वा सत्त्ववन्तश्च सूदिता:।
देवदानवरक्षांसि पिशाचोरगपन्नगा:॥ ८॥
न च पश्यामहेऽश्वं ते अश्वहर्तारमेव च।
किं करिष्याम भद्रं ते बुद्धिरत्र विचार्यताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! हमने सारी पृथ्वी छान मारी। देवताओं, दैत्यों, दानवों, भूतों, सर्पों तथा अन्य शक्तिशाली प्राणियों को मार डाला। परन्तु हमें न तो घोड़ा कहीं दिखा, न ही उसे चुराने वाला। आपका कल्याण हो। अब हमें क्या करना चाहिए? आप ही इस विषय में कोई उपाय सोचिए।'॥8-9॥
 
‘Father! We searched the entire earth. We killed gods, demons, devils, ghosts and snakes and other powerful creatures. But we did not see the horse anywhere, nor the person who stole it. May you be blessed. What should we do now? You please think of a solution in this matter.’॥ 8-9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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