श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 40: सगर के पुत्रों का पृथ्वी को खोदते हुए कपिलजी के पास पहुँचना और उनके रोष से जलकर भस्म होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.40.13 
खन्यमाने ततस्तस्मिन् ददृशु: पर्वतोपमम्।
दिशागजं विरूपाक्षं धारयन्तं महीतलम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उसी खुदाई के समय उन्हें विरुपाक्ष नामक एक विशाल पर्वताकार प्राणी दिखाई दिया, जो इस पृथ्वी को धारण किये हुए था॥13॥
 
During that very excavation, he saw a giant mountainous being named Virupaksha. He was holding this earth.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)