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श्लोक 1.40.13  |
खन्यमाने ततस्तस्मिन् ददृशु: पर्वतोपमम्।
दिशागजं विरूपाक्षं धारयन्तं महीतलम्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| उसी खुदाई के समय उन्हें विरुपाक्ष नामक एक विशाल पर्वताकार प्राणी दिखाई दिया, जो इस पृथ्वी को धारण किये हुए था॥13॥ |
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| During that very excavation, he saw a giant mountainous being named Virupaksha. He was holding this earth.॥ 13॥ |
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