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श्लोक 1.40.11  |
भूय: खनत भद्रं वो विभेद्य वसुधातलम्।
अश्वहर्तारमासाद्य कृतार्थाश्च निवर्तत॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| ‘जाओ, सारी पृथ्वी को फिर खोदकर फाड़ डालो और घोड़ा चोर को ढूंढ़ो। चोर के पास पहुँचकर अपना काम पूरा करके ही लौटना।’॥11॥ |
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| ‘Go, dig up the entire earth again and tear it apart to find the horse thief. Return only after you reach the thief and complete your task.’॥ 11॥ |
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