श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  1.4.8-9 
पाठॺे गेये च मधुरं प्रमाणैस्त्रिभिरन्वितम्।
जातिभि: सप्तभिर्युक्तं तन्त्रीलयसमन्वितम्॥ ८॥
रसै: शृंगारकरुणहास्य रौद्रभयानकै:।
वीरादिभी रसैर्युक्तं काव्यमेतदगायताम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
वह महाकाव्य पढ़ने और गाने में मधुर है, तीव्र, मध्यम और विलम्बित तीन गतियों से युक्त है, षड्ज आदि सात स्वरों से युक्त है, वीणा बजाकर सुर और लय के साथ गाया जा सकता है और वह श्रृंगार, करुणा, हास्य, रौद्र, भयंकर और वीर आदि सभी भावों से प्रेरित है। कुश और लव दोनों भाई उस महाकाव्य को पढ़कर गाने लगे॥ 8-9॥
 
That epic is sweet to read and sing, it is composed of three speeds - fast, medium and vilambit, it is composed of seven notes like shadja, etc., it can be sung with melody and rhythm by playing veena and it is inspired by all the emotions like shringar, karuna, hasya, raudra, bhayanak and veer. Both the brothers Kush and Lav started singing that epic after reading it.॥ 8-9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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