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ramayan 1.4.3: भविष्य और उत्तरकाण्ड सहित सम्पूर्ण रामायण का ग्रन्थ पूरा करने के पश्चात् बलवान एवं बुद्धिमान महर्षि ने विचार किया कि ऐसा कौन बलवान पुरुष होगा जो इस महाकाव्य को पढ़कर जनसाधारण को सुना सके॥3॥   |   ramayan सर्ग 1.4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.4.3 
कृत्वा तु तन्महाप्राज्ञ: सभविष्यं सहोत्तरम्।
चिन्तयामास को न्वेतत् प्रयुञ्जीयादिति प्रभु:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भविष्य और उत्तरकाण्ड सहित सम्पूर्ण रामायण का ग्रन्थ पूरा करने के पश्चात् बलवान एवं बुद्धिमान महर्षि ने विचार किया कि ऐसा कौन बलवान पुरुष होगा जो इस महाकाव्य को पढ़कर जनसाधारण को सुना सके॥3॥
 
After completing the entire Ramayana including Bhavishya and Uttarkanda, the powerful and wise Maharishi thought who would be such a powerful man who could read this epic and narrate it to the masses. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)