Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.4.28-33h: एक समय सर्वत्र प्रशंसित राजकुमार कुश और लव अयोध्या की गलियों और मार्गों में रामायण की चौपाइयां गाते हुए विचरण कर रहे थे। उस समय भरत के बड़े भाई श्री राम ने उन्हें देखा। उन्होंने उन पूजनीय भाइयों को अपने घर बुलाकर उनका यथोचित सम्मान किया। तत्पश्चात शत्रुओं का नाश करने वाले श्री राम सुवर्णमय दिव्य सिंहासन पर विराजमान हुए। उनके मंत्री और भाई भी उनके निकट बैठे थे। सुन्दर रूप वाले उन दोनों विनीत भाइयों को देखकर श्री राम ने भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न से कहा - 'देवताओं के समान तेजस्वी ये दोनों राजकुमार विचित्र अर्थों और शब्दों से युक्त मधुर काव्य अत्यंत सुंदर रीति से गाते हैं। तुम सब लोग इसे सुनो।' ऐसा कहकर उन्होंने दोनों भाइयों को गाने का आदेश दिया। | ramayan सर्ग 1.4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एक समय सर्वत्र प्रशंसित राजकुमार कुश और लव अयोध्या की गलियों और मार्गों में रामायण की चौपाइयां गाते हुए विचरण कर रहे थे। उस समय भरत के बड़े भाई श्री राम ने उन्हें देखा। उन्होंने उन पूजनीय भाइयों को अपने घर बुलाकर उनका यथोचित सम्मान किया। तत्पश्चात शत्रुओं का नाश करने वाले श्री राम सुवर्णमय दिव्य सिंहासन पर विराजमान हुए। उनके मंत्री और भाई भी उनके निकट बैठे थे। सुन्दर रूप वाले उन दोनों विनीत भाइयों को देखकर श्री राम ने भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न से कहा - 'देवताओं के समान तेजस्वी ये दोनों राजकुमार विचित्र अर्थों और शब्दों से युक्त मधुर काव्य अत्यंत सुंदर रीति से गाते हैं। तुम सब लोग इसे सुनो।' ऐसा कहकर उन्होंने दोनों भाइयों को गाने का आदेश दिया।
Once, the universally praised princes Kush and Lav were roaming the streets and roads of Ayodhya singing verses from the Ramayana. At that time, Bharat's elder brother Shri Ram saw them. He called those respectable brothers to his house and honoured them appropriately. Thereafter, Shri Ram, the destroyer of enemies, sat on the golden divine throne. His ministers and brothers were also sitting near him. Looking at those two humble brothers with beautiful looks, Shri Ram said to Bharat, Lakshman and Shatrughna - 'These two princes, radiant like gods, sing sweet poetry with strange meanings and words in a very beautiful manner. All of you listen to it.' Saying this, he ordered both the brothers to sing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥