श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  1.4.27-28h 
अभिगीतमिदं गीतं सर्वगीतिषु कोविदौ॥ २७॥
आयुष्यं पुष्टिजननं सर्वश्रुतिमनोहरम्।
 
 
अनुवाद
हे समस्त गान विद्या में निपुण राजकुमारों! यह काव्य आयु और बल देने वाला मधुर संगीत है, जो सबके कानों और मन को मोहित कर लेता है। आप दोनों ने इसे बहुत सुन्दरता से गाया है।
 
O princes who are experts in all songs! This poem is a melodious music which gives longevity and strength and which captivates everyone's ears and mind. You both have sung it very beautifully. 27 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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