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श्लोक  1.4.22-23 
कश्चित् कमण्डलुं प्रादान्मौञ्जीमन्यो महामुनि:।
बृसीमन्यस्तदा प्रादात् कौपीनमपरो मुनि:॥ २२॥
ताभ्यां ददौ तदा हृष्ट: कुठारमपरो मुनि:।
काषायमपरो वस्त्रं चीरमन्यो ददौ मुनि:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
एक ने जल का कलश, दूसरे ने मुंज की मेखला, तीसरे ने आसन और चौथे ने लंगोटी भेंट की। एक और ऋषि ने प्रसन्न होकर दोनों बालकों के लिए कुल्हाड़ी भेंट की। एक ने भगवा वस्त्र और तीसरे ने चिथड़ा भेंट किया।
 
One offered a water pot, another great sage offered a Munja's belt. The third offered a seat and the fourth a loincloth. Another sage, filled with joy, offered an axe for the two boys. One offered saffron clothes, another sage offered a rag.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)