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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  1.4.20-21 
प्रीत: कश्चिन्मुनिस्ताभ्यां संस्थित: कलशं ददौ॥ २०॥
प्रसन्नो वल्कलं कश्चिद् ददौ ताभ्यां महायशा:।
अन्य: कृष्णाजिनमदाद् यज्ञसूत्रं तथापर:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उनके गायन से संतुष्ट होकर एक ऋषि ने खड़े होकर उन्हें एक घड़ा पुरस्कार स्वरूप दिया। एक अन्य ऋषि ने प्रसन्न होकर उन्हें छाल के वस्त्र दिए। किसी ने काले मृगचर्म और किसी ने जनेऊ भेंट किया।
 
Satisfied with their singing, a sage stood up and gave them a pitcher as a reward. Another great sage, pleased with them, gave them bark clothes. Someone presented a black deerskin and someone presented a sacred thread.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)