श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.4.2 
चतुर्विंशत्सहस्राणि श्लोकानामुक्तवानृषि:।
तथा सर्गशतान् पञ्च षट्काण्डानि तथोत्तरम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
इसमें महर्षि ने चौबीस हजार श्लोक, पाँच सौ स्कन्ध और उत्तरसहित सात अध्यायों का वर्णन किया है॥2॥
 
In this the great sage has expounded twenty four thousand verses, five hundred cantos and seven chapters with answers.॥ 2॥
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