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ramayan 1.4.17: रामायण कथा के गायक कुमार कुश और लवकी, जो स्तुति के योग्य थे, उनकी इस प्रकार स्तुति करने लगे - 'अहा! इन बालकों का गान कितना मधुर है। श्लोकों की मधुरता तो और भी अद्भुत है।॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 1.4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.4.17 
प्रशशंसु: प्रशस्तव्यौ गायमानौ कुशीलवौ।
अहो गीतस्य माधुर्यं श्लोकानां च विशेषत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
रामायण कथा के गायक कुमार कुश और लवकी, जो स्तुति के योग्य थे, उनकी इस प्रकार स्तुति करने लगे - 'अहा! इन बालकों का गान कितना मधुर है। श्लोकों की मधुरता तो और भी अद्भुत है।॥ 17॥
 
The singers of the Ramayana story, Kumar Kush and Lavki, who were worthy of praise, started praising them thus - 'Oh! How sweet is the song of these children. The sweetness of the verses is even more amazing.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)