श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 4: महर्षि वाल्मीकि का चौबीस हजार श्लोकों से युक्त रामायण का निर्माण करना , लव-कुश का अयोध्या में रामायण गान सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.4.10 
तौ तु गान्धर्वतत्त्वज्ञौ स्थानमूर्च्छनकोविदौ।
भ्रातरौ स्वरसम्पन्नौ गन्धर्वाविव रूपिणौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों भाई गन्धर्व विद्या में निपुण, अचेतन की प्रथम और द्वितीय विद्या में निपुण, गन्धर्वों के समान मधुर वाणी और सुन्दर रूप वाले थे ॥10॥
 
Both of those brothers were experts in Gandharva Vidya (musicology), experts in 1st place and 2nd knowledge of unconsciousness, blessed with melodious voice and beautiful appearance like Gandharvas. 10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas