Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.39.6-7h: 'पुरुषसिंह! यज्ञ करने के लिए वही देश श्रेष्ठ माना गया है। तात ककुत्स्थानन्दन! राजा सगर की आज्ञा से यज्ञ के अश्व की रक्षा का भार बलवान धनुर्धर एवं महारथी अंशुमान ने स्वीकार किया। 6 1/2॥ | ramayan सर्ग 1.39: इन्द्र के द्वारा राजा सगर के यज्ञ सम्बन्धी अश्व का अपहरण, सगरपुत्रों द्वारा सारी पृथ्वी का भेदन । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स हि देशो नरव्याघ्र प्रशस्तो यज्ञकर्मणि।
तस्याश्वचर्यां काकुत्स्थ दृढधन्वा महारथ:॥ ६॥
अंशुमानकरोत् तात सगरस्य मते स्थित:।
अनुवाद
'पुरुषसिंह! यज्ञ करने के लिए वही देश श्रेष्ठ माना गया है। तात ककुत्स्थानन्दन! राजा सगर की आज्ञा से यज्ञ के अश्व की रक्षा का भार बलवान धनुर्धर एवं महारथी अंशुमान ने स्वीकार किया। 6 1/2॥
'Purush Singh! The same country is considered best for performing Yagya. Tat Kakutsthanandan! On the orders of King Sagar, the responsibility of protecting the sacrificial horse was accepted by the strong archer and master Anshuman. 6 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥