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ramayan 1.39.2: 'ब्रह्मन्! आपका कल्याण हो। मैं यह कथा विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। मेरे पूर्वज महाराज सगर ने किस प्रकार यज्ञ किया था?'॥2॥   |   ramayan सर्ग 1.39: इन्द्र के द्वारा राजा सगर के यज्ञ सम्बन्धी अश्व का अपहरण, सगरपुत्रों द्वारा सारी पृथ्वी का भेदन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.39.2 
श्रोतुमिच्छामि भद्रं ते विस्तरेण कथामिमाम्।
पूर्वजो मे कथं ब्रह्मन् यज्ञं वै समुपाहरत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
'ब्रह्मन्! आपका कल्याण हो। मैं यह कथा विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। मेरे पूर्वज महाराज सगर ने किस प्रकार यज्ञ किया था?'॥2॥
 
'Brahman! May you be blessed. I want to hear this story in detail. How did my ancestor Maharaja Sagar perform the yajna?'॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)