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ramayan 1.39.18: सम्पूर्ण पृथ्वीकी परिक्रमा करनेपर भी अश्वको न देखकर उन पराक्रमी पुरुषसिंहपुत्रोंने एक-एक योजन भूमि अपने-अपने भागमें बाँट ली और अपनी भुजाओंसे उसे खोदने लगे। उन भुजाओंका स्पर्श वज्रके समान असह्य था॥18॥   |   ramayan सर्ग 1.39: इन्द्र के द्वारा राजा सगर के यज्ञ सम्बन्धी अश्व का अपहरण, सगरपुत्रों द्वारा सारी पृथ्वी का भेदन   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 39: इन्द्र के द्वारा राजा सगर के यज्ञ सम्बन्धी अश्व का अपहरण, सगरपुत्रों द्वारा सारी पृथ्वी का भेदन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.39.18 
गत्वा तु पृथिवीं सर्वामदृष्ट्वा तं महाबला:।
योजनायामविस्तारमेकैको धरणीतलम्।
बिभिदु: पुरुषव्याघ्रा वज्रस्पर्शसमैर्भुजै:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण पृथ्वीकी परिक्रमा करनेपर भी अश्वको न देखकर उन पराक्रमी पुरुषसिंहपुत्रोंने एक-एक योजन भूमि अपने-अपने भागमें बाँट ली और अपनी भुजाओंसे उसे खोदने लगे। उन भुजाओंका स्पर्श वज्रके समान असह्य था॥18॥
 
‘After going round the whole earth and not seeing the horse, those mighty sons of Purushsingha (the lion) princes divided the land of one yojana in each one's share and started digging it with their arms. The touch of those arms was as unbearable as the touch of a thunderbolt.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)