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ramayan 1.38.6: 'सौ वर्ष पूर्ण होने पर सत्यपुरुषों में श्रेष्ठ महर्षि भृगुन ने राजा सगर की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया ॥6॥   |   ramayan सर्ग 1.38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.38.6 
अथ वर्षशते पूर्णे तपसाऽऽराधितो मुनि:।
सगराय वरं प्रादाद् भृगु: सत्यवतां वर:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'सौ वर्ष पूर्ण होने पर सत्यपुरुषों में श्रेष्ठ महर्षि भृगुन ने राजा सगर की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया ॥6॥
 
'On completion of his hundred years, Maharishi Bhrigun, the best among truthful people, pleased by his penance, gave a boon to King Sagar. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)